(N/A) जीवद्रव्यकुंचन (Plasmolysis) वह प्रक्रिया है जिसमें पादप कोशिकाएं एक अतिपरासारी (hypertonic) घोल में पानी खो देती हैं,जिससे जीवद्रव्य (protoplast) कोशिका भित्ति से दूर सिकुड़ जाता है।
$1$. घोल के प्रकार:
- समपरासारी (Isotonic) घोल: एक बाहरी घोल जो कोशिका द्रव्य के परासरण दाब को संतुलित करता है।
- अल्पपरासारी (Hypotonic) घोल: एक बाहरी घोल जो कोशिका द्रव्य की तुलना में अधिक तनु (dilute) होता है,जिससे पानी कोशिका के अंदर प्रवेश करता है।
- अतिपरासारी (Hypertonic) घोल: एक बाहरी घोल जो कोशिका द्रव्य की तुलना में अधिक सांद्र होता है,जिससे पानी कोशिका से बाहर निकल जाता है।
$2$. जीवद्रव्यकुंचन की प्रक्रिया:
- जब एक जीवित पादप कोशिका को अतिपरासारी घोल में रखा जाता है,तो परासरण के कारण पानी कोशिका से बाहर निकल जाता है।
- पानी पहले कोशिका द्रव्य से और फिर रिक्तिका (vacuole) से बाहर निकलता है।
- जैसे-जैसे पानी बाहर निकलता है,कोशिका झिल्ली कोशिका भित्ति से दूर सिकुड़ जाती है,इस स्थिति को जीवद्रव्यकुंचन कहा जाता है।
- जब कोशिका भित्ति और सिकुड़े हुए जीवद्रव्य के बीच की जगह बाहरी अतिपरासारी घोल से भर जाती है,तो कोशिका को जीवद्रव्यकुंचित कहा जाता है।
$3$. चित्र:
$(A)$ जीवद्रव्यकुंचित कोशिका (पानी बाहर निकल रहा है)
$(B)$ श्लथ (Flaccid) कोशिका (पानी का कोई शुद्ध संचलन नहीं)
$(C)$ स्फीत (Turgid) कोशिका (पानी अंदर आ रहा है)